विमलेश्वर महादेव आश्रम
इस विमलेश्वर महादेव आश्रम में ६० वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को
आजीवन स्थापित करने की व्यवस्था है। जिसमें आवास,भोजन, पूजा सामग्री
दी जाती है और श्री नर्मदा एवं शिव की पूजा भी सिखायी जाती है। इस
सुविधा से महिला का शेष जीवन सुधरेगा, शंातिपूर्ण मृत्यु होगी और निश्चित
रूप से अगला जन्म राजकुल में होगा। मरने पर अंतिम संस्कार और श्राद्ध
की भी व्यवस्था है। भक्त महिलाओं को शुल्क एडंवास में जमा करना होता
है।
स्वामी ब्रह्मानन्द जी हिमालय और दिव्य नदी नर्मदा के शैव-क्षेत्रों
में अधिक भ्रमण करते है। श्री अरूणाचल पर्वत तीर्थ में जहॉं ब्रह्मा-विष्णु
का युद्ध हुआ था, जहॉं काल-भैरव की उत्पत्ति हुई थी, जहॉं से शिवलिंग
की पूजा प्रारंभ हुई थी वहॉं स्वामी ब्रह्मानन्द जी का मुख्य सेवा
केन्द्र ज्ञान प्राप्ति के लिए स्थापित है। श्री गोकर्ण महाबलेश्वर
(कर्नाटक राज्य) जहॉं महा शिवरात्रि पूजन का विशेष महत्व है, वहॉं
पर भी स्वामी ब्रह्मानन्द जी का एक सेवा केन्द्र है। आन्ध्रप्रदेश
के श्री कालहस्तीश्वर महादेव जहॉं श्री ज्ञान प्रसूनाम्बा शक्ति विराजमान
है। कणप्पा(पूर्व जन्म के पाण्ड़व अर्जुन)की तपस्थली है। वहॉं पर भी
एक सेवा केन्द्र हैं। स्वामी ब्रह्मानन्द जी ने दिव्य नदी नर्मदा जी
की तीन बार परिक्रमा की है और नर्मदा उद्गम स्थान अमरकण्टक से लेकर
रत्नासागर संगम तक अमरकण्टक, ओंकारेश्वर, महेश्वर, सहस्त्रधारा, शुक्लतीर्थ,
कोटि तीर्थ, भार-भूतेश्वर पर सेवा केन्द्र है। दिव्य नदी नर्मदा के
नाभि-क्षेत्र, दक्षिण तट जहॉं धनाध्यक्ष कुबेर ने ऋद्धीश्वर, सिद्धेश्वर
महादेव की स्थापना की, जहॉं काल भैरव ने अरूणाचल क्षेत्र में ब्रह्मा
का सिर काटकर, काशी में जाने से पूर्व नर्मदा तट पर तपस्या की, उसी
स्थान पर श्री विमलेश्वर महादेव की स्थापना स्वामी ब्रह्मानन्द जी
ने की है।(नयापुरा रोड़, पोस्ट हण्ड़िया, जिला हरदा, मध्यप्रदेश)।
इस विमलेश्वर महादेव आश्रम में आकाश का प्रतीक तारकेश्वर शिवलिंग,पाताल
का प्रतीक हाटकेश्वर शिवलिंग और पृथ्वी तल का प्रतीक महाकालेश्वर शिवलिंग
है। महाकैलास का प्रतीत है श्री काल-भैरव का भव्य मंदिर है। श्री प्रलयकारी
का भव्य मंदिर है। स्वामी ब्रह्मानन्द की तपस्थली श्री अमरनाथ गुफा
का प्रतीक तीन खण्ड़ीय भजन कुटी में अष्ट लोकपाल(इन्द्रादि) के प्रतीक
स्थापित है और द्वादश ज्योतिर्लिंगों के प्रतीत स्थापित है। |